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ज्वालामुखी कैसे काम करते हैं? मैग्मा और उद्गार

मैग्मा सतह पर लावा बनता है और हवाई जैसे ढाल व फूजी जैसे स्तरित ज्वालामुखी बनाता है।

ज्वालामुखी कैसे काम करते हैं? मैग्मा और उद्गार

नीचे मैग्मा ऊपर लावा

मैग्मा 5 से 150 किलोमीटर गहराई में 700 से 1200 अंश गर्म पिघली चट्टान है। बाहर आकर लावा कहलाता है। गैस बुलबुले विस्फोट चलाते हैं और 60 प्रतिशत से अधिक सिलिका गाढ़ा चिपचिपा प्रवाह बनाती है।

हवाई जैसे ढाल ज्वालामुखी पतला बेसाल्ट बहाते हैं और समुद्र तल से 10 किलोमीटर उठते हैं ढलान केवल 8 अंश। फूजी जैसे स्तरित ज्वालामुखी राख और लावा जमाकर 30 अंश शंकु बनाते हैं हर 200 वर्षों में फूटकर।

उद्गार कहां आते हैं

लगभग 90 प्रतिशत भूकंप और 75 प्रतिशत ज्वालामुखी 40 हजार किलोमीटर लंबे प्रशांत अग्नि वलय में हैं। वहां महासागरीय प्लेट 100 किलोमीटर गहराई में धंसती है पिघलती है और 450 सक्रिय ज्वालामुखी पोषित करती है।

आइसलैंड सीधे अटलांटिक दरार पर है और 32 सक्रिय तंत्रों से हर 4 वर्षों में फूटता है। वैज्ञानिक 6 महीनों के झटकों दोगुनी गंधक गैस और हर वर्ष 10 सेंटीमीटर धरती उभार से पूर्वानुमान करते हैं।

  • गहराई में मैग्मा सतह पर लावा
  • हवाई ढाल 10 किलोमीटर ऊंचा
  • फूजी शंकु 30 अंश का
  • अग्नि वलय में 450 ज्वालामुखी
  • आइसलैंड हर 4 वर्षों में फूटता है
विषय:ज्वालामुखी कैसे काम करते हैंमैग्मा और लावाढाल और स्तरित ज्वालामुखीअग्नि वलय
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