महाज्वालामुखी: टोबा, येलोस्टोन और ज्वालामुखी शीत
आठवें स्तर का विस्फोट 1000 घन किलोमीटर से अधिक राख फेंकता है और पृथ्वी वर्षों जमा सकता है।

आठवें स्तर का धमाका क्या है
ज्वालामुखी विज्ञानी विस्फोट शून्य से आठ आँकते हैं, केवल आठवें स्तर के महाविस्फोट 1000 घन किलोमीटर से अधिक राख फेंकते हैं, 1980 के सेंट हेलेन्स से 10000 गुना। ऐसे धमाके धरती 100 किलोमीटर काल्डेरा में धँसाते हैं, महाद्वीपों पर राख फैलाते हैं और गंधक भरते हैं जो वर्षों सूर्य परावर्तित करता है।
सुमात्रा का टोबा 74 हज़ार वर्ष पहले फूटा, 2800 घन किलोमीटर मैग्मा उड़ेला और 100 किलोमीटर लंबी टोबा झील छोड़ी। कुछ जीन सुझाते हैं मानव कुछ हज़ार रह गए, पर पुरातत्व दिखाता है भारत और अफ्रीका की औज़ार संस्कृतियाँ राख में बचीं।
येलोस्टोन और अगला शीत
येलोस्टोन 640 हज़ार, 13 लाख और 21 लाख वर्ष पहले फूटा, अंतिम ने 70 किलोमीटर काल्डेरा बनाया जिसमें ओल्ड फेथफुल गीज़र हैं। भावी महाधमाका विश्व तापमान तीन से पाँच डिग्री छह वर्ष गिरा सकता है, अमेरिका और चीन की मक्का फसल दस प्रतिशत काट सकता है।
उपग्रह और 50 भूकंपमापी देखते हैं येलोस्टोन वर्ष में सात सेंटीमीटर उठता है, मैग्मा केवल पाँच से पंद्रह प्रतिशत पिघला है। महाविस्फोट संभावना वर्ष में लगभग 7 लाख में एक है, जबकि 2010 के आइसलैंड जैसे चौथे स्तर के छोटे धमाके ही असली उड़ान जोखिम हैं।
- आठवाँ स्तर: 1000 घन किमी से अधिक राख
- टोबा: 74 हज़ार वर्ष पहले, 2800 घन किमी
- येलोस्टोन: 640 हज़ार वर्ष पहले, 70 किमी काल्डेरा
- शीत: वर्षों 3 से 5 डिग्री गिरावट
- आज: निगरानी, वर्ष में 7 लाख में एक