पानी कहाँ से आया? क्षुद्रग्रह या ज्वालामुखी
महासागर 4.4 अरब वर्ष पहले आए पर पृथ्वी द्रव्यमान का 0.02 प्रतिशत ही हैं, 97 प्रतिशत खारा है।

ज्वालामुखी और क्षुद्रग्रह दोनों लाए पानी
4.4 अरब वर्ष पहले जिरकॉन क्रिस्टल पृथ्वी बनने के 15 करोड़ वर्ष बाद तरल महासागर दिखाते हैं। ज्वालामुखियों ने भाप छोड़ी हजारों वर्ष बरसी, जबकि बर्फीले क्षुद्रग्रहों ने लगभग 4 अरब वर्ष पहले भारी बमबारी में पानी जोड़ा।
पृथ्वी में 1.4 अरब घन किलोमीटर पानी पर ग्रह द्रव्यमान का 0.02 प्रतिशत ही। समतल फैलाएँ तो महासागर 3 किलोमीटर गहरे ढकें, पर 97 प्रतिशत खारा और 3 प्रतिशत मीठा, अधिकतर बर्फ में बंद।
धूमकेतु दोषी लगते पर निशान अलग
कार्बन क्षुद्रग्रह पृथ्वी जल से हाइड्रोजन अनुपात में मिलते, जबकि कई धूमकेतु दोगुना भारी जल रखते। यह अंतर क्षुद्रग्रहों को बताता, धूमकेतु नहीं, जिन्होंने 4.4 से 3.8 अरब वर्ष पहले अधिकतर महासागर दिए।
पानी रहा क्योंकि पृथ्वी वासयोग्य क्षेत्र में जहाँ महासागर न उबलते न पूर्ण जमते। शुक्र ने अंतरिक्ष ताप से जल खोया, मंगल जमा और हवा खोई, जबकि चुंबकीय कवच व गुरुत्व ने पृथ्वी 4 अरब वर्ष गीली रखी।
- पहले महासागर 4.4 अरब वर्ष पहले, जिरकॉन प्रमाण
- कुल जल पृथ्वी द्रव्यमान का 0.02 प्रतिशत ही
- 97 प्रतिशत खारा, 3 प्रतिशत मीठा, 2 प्रतिशत बर्फ
- क्षुद्रग्रह जल मिलता, धूमकेतु दोगुना भारी जल
- वासयोग्य क्षेत्र व कवच ने तरल महासागर रखे