दक्कन ट्रैप: डायनासोर दुर्बल करने वाले भारतीय ज्वालामुखी
66 मिलियन वर्ष पहले भारतीय लावा पाँच लाख वर्ग किलोमीटर छाया और क्षुद्रग्रह से पहले डायनासोर तनावग्रस्त हुए।

भारत में दस लाख वर्ष की आग
लगभग 66 मिलियन वर्ष पहले पश्चिमी भारत दरारों ने पाँच लाख वर्ग किलोमीटर पर बेसाल्ट उड़ेला, 2000 मीटर मोटी परतें जमाईं। विस्फोट लगभग दस लाख वर्ष धड़के, चिक्सुलब टक्कर से चार लाख वर्ष पहले शुरू होकर बाद तक चले।
गंधक ने पहले छोटे ज्वालामुखी शीत लाए, फर्न और बीज फसल विफल हुई, फिर कार्बन डाइऑक्साइड ने पृथ्वी चार डिग्री गर्म की। महासागर अम्लीय हुए, मिट्टी पारे से विषैली हुई, और भारत, चीन व फ्रांस में डायनासोर अंडे छिलके अंतिम विलोप से पहले पतले हुए।
ज्वालामुखी, क्षुद्रग्रह या दोनों
वैज्ञानिक दशकों बहसे कि दक्कन गैसों ने या क्षुद्रग्रह ने डायनासोर मारे, पारा शिखर और लावा तिथियाँ ज्वालामुखी पक्ष में थीं। नई उच्च परिशुद्ध तिथियाँ दिखाती हैं कि 70 प्रतिशत आयतन टक्कर ठीक पहले निकला, फिर बाद में दूसरी धड़कन, जो घातक दोहरी चोट सुझाती है।
आज दक्कन बेसाल्ट महाराष्ट्र में चपटी पहाड़ियाँ बनाते हैं, पश्चिमी घाट सड़क व रेल किनारे 1000 मीटर खड़ी चट्टानें खोलते हैं। अजंता और एलोरा गुफाएँ इसी लावा में कटी हैं, दर्शक उस प्रवाह को छू सकते हैं जिसने डायनासोर आकाश काला किया।
- स्थान: पश्चिमी भारत, पाँच लाख वर्ग किलोमीटर लावा
- समय: 66 मिलियन वर्ष पहले, टक्कर पहले और बाद
- प्रभाव: गंधक शीत, फिर 4 डिग्री ताप
- प्रमाण: पारा, पतले छिलके, लावा तिथियाँ
- आज: बेसाल्ट, घाट चट्टानें, अजंता गुफाएँ